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Showing posts from April, 2021

इंसान की इंसानियत।

देश गुजर रहा है इस वक़्त काफी मुश्किल घड़ी से , ये दिख गया है लोगो की बातों में,  ऐसा समय है चल रहा, जो नहीं है किसी सरकार के हांथों में, तभी डरे डरे से सहमे - सहमे से लोग रहते है आजकल दिन और रातों में, ये वक़्त मांगता है सबका साथ, तभी जीत पाएगा देश इस बार, पर पता नहीं क्या चल रहा है आजकल लोगों के विचारो में,  कोई कर रहा है राजनीति ,तो कोई कोस रहा है सरकार को कोई अपनी गलती मान ने से कर रहा है इंकार ,तो कोई गलत बातें सिखा रहा है लोगों को पढ़ के अखबार ,ये सब देख कर सोच में पड़ जाते है ,कि पता नहीं कोनसी गलत चीज़े इंसान सीख - पढ़ रहा है किताबो मै, इंसान इंसानियत ही भूल गया है ,मानो इस देश की संस्कृति को छोड़ वो कोषों दूर गया है, ये कैसा स्वभाव बना रहा है इंसान, कि मानो वो रहना भूल गया हो संस्कारो में, आज के समय का दृश्य देख कर एक बात बोलना चाहूंगा मै, कि सुना है इंसानियत बिच रही है आजकल बाजारों में, लोग तो बस नफ़रत ही छपवा रहे है इश्तहारों में, अख़बारों में समाचारों में एक दूसरे के विचारो में, अंजानों में या यारो में लोग तो बस नफ़रत छपवा रहे है इश्तहारों में, इस वक़्त की गंभीरता ...

मन के बोल।

उन पानी की लहरों को तो ज़रा देखो, वो लहरें कुछ कह रही हैं शायद ,बीते पल की यादें उनमें बह रही है, आओ बैठो बात करो काफी परेशान से लगते हो लम्बे सफर के बाद थक कर आए मेहमान से लगते हो, कुछ बातें करनी थी तुम्हे भी शायद, पर कुछ कह नहीं पा रहे हो शायद काफी दुख मिला है तुम्हे जिसे तुम सह नहीं पा रहे हो, उठो चलो साथ आओ आज फिर एक नए सफर पर जाना है गैरो के दर्द को कब समझा ये ज़माना है, वो बातें जिन्हे तुम आज भी याद करते हो वो बातें बड़ी पुरानी है दो लफ़्ज़ों की गुफ्तगू में लिखी तुमने कहानी है, हिम्मत कर आगे बढ़ सब होगा फिर से ,ठीक पहुंचेगा तू मंज़िल पे तू है जीत के करीब, ये बात ना किसी ने बोली है और ये बात ना कोई बोलेगा इस मतलब की दुनिया मै एक दिन तेरा नाम भी बोलेगा। ~Akrit काफी वक़्त बाद आज ब्लॉग डाला है, कुछ थोड़ा अलग काम करना चाह रहे है जल्द बताएंगे और ब्लॉग आते रहेंगे जुड़े रहिए। SOCIAL MEDIA.