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इंसान की इंसानियत।



देश गुजर रहा है इस वक़्त काफी मुश्किल घड़ी से , ये दिख गया है लोगो की बातों में, 


ऐसा समय है चल रहा, जो नहीं है किसी सरकार के हांथों में, तभी डरे डरे से सहमे - सहमे से लोग रहते है आजकल दिन और रातों में,


ये वक़्त मांगता है सबका साथ, तभी जीत पाएगा देश इस बार,

पर पता नहीं क्या चल रहा है आजकल लोगों के विचारो में, 


कोई कर रहा है राजनीति ,तो कोई कोस रहा है सरकार को कोई अपनी गलती मान ने से कर रहा है इंकार ,तो कोई गलत बातें सिखा रहा है लोगों को पढ़ के अखबार ,ये सब देख कर सोच में पड़ जाते है ,कि पता नहीं कोनसी गलत चीज़े इंसान सीख - पढ़ रहा है किताबो मै,


इंसान इंसानियत ही भूल गया है ,मानो इस देश की संस्कृति को छोड़ वो कोषों दूर गया है, ये कैसा स्वभाव बना रहा है इंसान, कि मानो वो रहना भूल गया हो संस्कारो में,


आज के समय का दृश्य देख कर एक बात बोलना चाहूंगा मै,

कि सुना है इंसानियत बिच रही है आजकल बाजारों में, लोग तो बस नफ़रत ही छपवा रहे है इश्तहारों में,


अख़बारों में समाचारों में एक दूसरे के विचारो में, अंजानों में या यारो में लोग तो बस नफ़रत छपवा रहे है इश्तहारों में,


इस वक़्त की गंभीरता को ना समझते हुए वो लगे है इन सब बातो में कभी चार यारो में तो कभी हज़ारों में बस नफ़रत ही छपवा रहे है इश्तहारों में,


ऐसा समय आ गया है कि आजकल लोग लगे है अस्पतालों कि कतारों में, बिस्तर के बिना मरीज बैठे है रोड पर हज़ारों में, फिर भी लोग नफ़रत ही छपवा रहे है इश्तहारों में।


उम्मीद करता हूं लोग छोड़ दे पड़ ना  इन दो कौड़ी की बातो में और हर व्यक्ति साथ खड़ा हो ,दे के हाथ - हाथों में इंसान को इंसानियत फिर समझ आ जाएं और नफ़रत ना छपे इश्तहारों में।

~Akrit


उम्मीद करूंगा आपको मेरी ये छोटी सी कोशिश पसंद आई हो कमेंट करके ज़रूर बताए धन्यवाद।

Social media.



Comments

  1. Good beta aaj ka परिदृश्य यही है

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  2. अपने शासक के दोषों को छिपाना देशभक्ति के नाम पर कलंक है।

    - महात्मा गांधी

    ReplyDelete

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