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वो मैं और चाय।


उसका साथ होना इतना ज़रूरी भी नहीं
उसके होने का एहसास ही बहुत हैं,
उससे मोहब्बत करने के लिए मुलाक़ात करना ज़रूरी नहीं
उसको याद करने के लिए ये चाय का ग्लास ही बहुत हैं,

मैं वो कहानी भूल कैसे जाऊ
जो तू मुझे याद दिलाती रोज़ हैं,
मैं तुझसे प्यार करना छोड़ कैसे दूं
जब प्यार करने के लिए कोई नई वजह देजाती तू रोज़ हैं,
वो पुरानी मुलाकातें 
वो चाय की टपरी पे की थी जो बातें,
उन सब बातों को याद रखने के लिए ये प्यार ही बहुत हैं,
उसको याद करने के लिए ये चाय का ग्लास ही बहुत हैं,
 
ये सफ़र ख़तम नहीं हो रहा अकेला मुझसे
शायद क्योंकि जीवन में आराम ही बहुत हैं,
वो साथ होती आज तो चीज़े थोड़ी आसान होती
मुझसे काम करवाने के लिए उसका प्यार ही बहुत हैं,
पर जो भी हैं जैसा भी हैं
उसका इंतज़ार आज भी बहुत हैं,
वो चाय हमें बुलाती हैं आज भी
उस शाम की चाय का एहसास ही बहुत हैं,

आज वो साथ नहीं तो कोई बात नहीं
ये शाम तो देखिए ये शाम सुहानी बहुत हैं,
ये मौसम आज सुरूर दे रहा हैं,
ये शाम बिताने के लिए चाय का ग्लास ही बहुत हैं।

~Akrit
#InternationalTeaDay

उम्मीद करूंगा लेख पसंद आया होगा अगर आया तो ज़रूर बताना धन्यवाद।










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यादें लेते आना।

सुना है तुम वापिस आरहे हो? अच्छा तो सुनो आते वक़्त एक काम करते आना  जो यादें हमने साथ बिताई थी वो यादें लेते आना, क्या है की थक गया हूं मै दिल को समझाते समझाते  यह पागल आज भी तेरे लिए पागल है, इस पागल दिल  की दवा लेते आना, सुनो आरहे हो तो आते आते यादें लेते आना, आज तुम्हे गए हुए एक अरसा बीत गया है और इस दौरान मुझे छोड़के हर चीज बदल गई है, अब मेरे लिए भी बदलाव की एक उमीद लेते आना, सुनो आरहे हो तो आते आते यादें लेते आना, क्या है की बदलना हम भी चाहते थे पर बदल नहीं पाए तुझे छोड़ना चाहते थे पर छोड़ नहीं पाए आज तेरे बिना दिल इतना अकेला पड़ गया है की कोई साथी नहीं है, इस दिल को बहलाने   के लिए एक खिलौना लेते आना, सुनो आरहे हो तो आते आते यादें लेते आना यादें लेते आना। -Akrit

ये आंसू।

 ये आंसू भी अब पलकों पे आते नही हैं देखो ना अब लोग मुझे तुम्हारे नाम से सताते नहीं हैं अब नही होता कोई दिन हसीन अब कोई पक्षी मेरे द्वार पर आ कर गाते नहीं हैं रात में बाहर ही रहता हूं अब मैं क्योंकि नींद लेने से डरने लगा हूं क्योंकि ये नींद के वक्त के सपने इन सपनों में भी हम साथ नजर अब आते नहीं हैं जो तुझे झुमके दिए थे मैंने कभी सुना है वैसे झुमके अब वो बनाते नही हैं महफिलों में बदनाम हो गया है अब हमारा नाम क्योंकि शराब पीके भी अब हम शायरी किसीको सुनाते नही हैं आज अनजाने में तेरे घर के सामने से निकलना हुआ देखा के जो फूल तू अपने बालों में लगाता था वो फूल भी अब तेरे बगीचे में नजर आते नही हैं तुझपे तो आज भी मेला लगा होगा ना लोगो का एक हम ही हैं जो किसीको पसंद आते नही हैं। ~Akrit 

तेरी यादें।

 मै एक मुसाफ़िर हूं जो तेरी गली मै आके भटकता है पता नहीं क्यों आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है, तेरे जाने के बाद कई लोग आए कई रिश्ते बनाए, पर पता नहीं क्यों वो रात का अकेलापन मुझे अंदर ही अंदर खटकता है आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है, की मै हूं वही पर वो बात नहीं है मेरे हाथो मै जो तेरा हाथ नहीं है, तुझे किसी और के साथ देख मन अभी भी मचलता है आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है, वो शामे याद है मुझे जो तेरे साथ गुजारी थी मै बहुत खुश था और ज़िंदगी बड़ी सुहानी थी, अब शाम मै भी वो बात नहीं जो तू मेरे साथ नहीं, बिना बात कभी - कभी रोता हूं मै क्योंकि इश्क़ मै खा चुका धोका हूं मै, ऐसे ही एक आशिक़  अपने प्यार के दीदार को तरस्ता है आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है तेरी यादों मै तड़पता है। -Akrit . My Social Handles(TAP THIS)