तू बात ना किया कर वफाओं की लोगो के साथ ऐसे भरी महफ़िल में अपनी पहचान गवाया नहीं करते, तू दिल फिर ना लगाना गैरो के साथ ऐसे अपने दिल को दुखाया नहीं करते, तू शायरी नहीं सुनाना महफिलों मै जाके ऐसे अपने अंदर का दर्द किसी को बताया नहीं करते, तू भरोसा ना कर जाना बिना सोचे किसी पर भी ऐसे पुरानी गलतियां दोहराया नहीं करते, तू ना देखना किसी को प्यार करते हुए ऐसे कोई नया दर्द उगाया नहीं करते, तू कमजोर ना पड़ जाना किसी गैर के सामने ऐसे खुदका मज़ाक बनाया नहीं करते, तू बात ना किया कर वफाओं की लोगो के साथ ऐसे भरी महफ़िल मै अपनी पहचान गवाया नहीं करते गवाया नहीं करते। -Akrit if you do like my writings then please share, comment your thoughts and follow the blog to support my work. My social handles
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