Skip to main content

टूट चुका हूं मै।

 टूट चुका हूं मै आ बचाले ले मुझे की प्यार है तुझे आज भी ये बतादे मुझे, दुनिया के सारे गम भूलजाऊ अपनी मोहब्बत का वो जाम फिर पिलादे मुझे,


छोड़ा था तुने हमें पराया कहकर दिल लगाया तुने गैरो को अपना समझकर, इस कदर टूट गया था मै तेरे जाने के गम से के निकल नहीं पाया हूं तेरी यादों के भँवर से वो पुराने गिलेशिखवे भुलाके अपनाले मुझे सुन टूट चुका हूं मै आ बच़ाले ले मुझे,

अकेला होगया था इतना की खूदसे ही डरने लगा था रातो को अकेले अपने - आप से बातें मै करने लगा था शायद लगने लगा था की नहीं आएगी तू वापिस इसलिए तुझे खोने के गम से मै डरने लगा था, इन अकेली रातों मै कुछ घेरी बातों मै अपना साथी बनाले मुझे सुन टूट चुका हूं मै आ बचालेे मुझे आ बचाले मुझे।

-Akrit

If you like my work then share,comment your thoughts and follow to support my work.



Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मैं कलम हूं।

 मैं कलम हूं लिखता जाऊंगा दिल की हर बात को लफ़्ज़ों में पीरोता जाऊंगा हर याद को हर बात को दिल के अंदर दफन हो चुके उस हर राज को मैैं पन्नों पे बिखेरता जाऊंगा मैं कलम हूं लिखता जाऊंगा, हा लिखूंगा उसके बारे में भी जिसने तुम्हे लिखना सिखाया है, लिखूंगा उसकी खूबसूरती के बारे में जिसे देख तू आज भी पागल हो जाता है लिखूंगा  उसके हर अंदाज़ - अदह के बारे में जो आज भी तुझे मदहोश करते है उसके प्यार के बारे में उसके इकरार के बारे में उसके जाने के बाद के गम के बारे में, उसके साथ होने की खुशी से लेके उसके ना होने के गम तक मैं तेरे साथ चलता जाऊंगा मैं कलम हूं लिखता जाऊंगा, लिखूंगा मैं तेरी ख्वाहिशों के बारे में जो तुने सिर्फ मुझे बताई है लिखूंगा मैं उन सपनों के बारे में जो तेरी ये आंखे रोज़ देखती है लिखूंगा उस खुशी के बारे में जो तू अपने माता - पिता के चेहरे पर देखना चाहता है लिखूंगा तेरी उन बचपन की यादों के बारे में जिन्हें याद करके आज भी तेरी आंखे भर आती है लिखूंगा तेरे यारों के बारे में जिन्हें तू कभी खुद बोल नहीं पाया और ना शायद बोल पाएगा की वो तेरे जीवन में उतने ही जरूरी है जितना जि...

हम सबके प्रिय कवि दुष्यंत कुमार जी।

                                                                                                     Photo Source-duniyahaigol.com दुष्यंत कुमार (1933-1975) हिंदी जगत के महान कवियों में से एक हैं, जब भी कविता या ग़ज़ल का ज़िक्र होता है तो इनका नाम ज़रूर आता है कई बड़े कवि और नेता इनकी कविताएं ग़ज़लें कवि सम्मेलन, सभाओं मै सुनाते रहते हैं, हर लेखक इन्हे अपने जीवन का प्रेरणा स्त्रोत मानता हैं, ये कवि होने के साथ साथ कथाकार और गज़लकार भी थे इनकी लिखी हुई कई कविताएं ग़ज़लें आज के सिनेमा और गानों मै कई बार इस्तेमाल की जा चुकी हैं, आज इस महापुरुष की कुछ लेख हम आपके समक्ष रखने की कोशिश करेंगे, चलिए साथ मिलकर आज दुष्यंत कुमार जी के काम कि सराहना करते हुए उनको याद करते है। 1.) केसे मंज़र सामने आने लगे हैं। केसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते गाते ...

इंसान की इंसानियत।

देश गुजर रहा है इस वक़्त काफी मुश्किल घड़ी से , ये दिख गया है लोगो की बातों में,  ऐसा समय है चल रहा, जो नहीं है किसी सरकार के हांथों में, तभी डरे डरे से सहमे - सहमे से लोग रहते है आजकल दिन और रातों में, ये वक़्त मांगता है सबका साथ, तभी जीत पाएगा देश इस बार, पर पता नहीं क्या चल रहा है आजकल लोगों के विचारो में,  कोई कर रहा है राजनीति ,तो कोई कोस रहा है सरकार को कोई अपनी गलती मान ने से कर रहा है इंकार ,तो कोई गलत बातें सिखा रहा है लोगों को पढ़ के अखबार ,ये सब देख कर सोच में पड़ जाते है ,कि पता नहीं कोनसी गलत चीज़े इंसान सीख - पढ़ रहा है किताबो मै, इंसान इंसानियत ही भूल गया है ,मानो इस देश की संस्कृति को छोड़ वो कोषों दूर गया है, ये कैसा स्वभाव बना रहा है इंसान, कि मानो वो रहना भूल गया हो संस्कारो में, आज के समय का दृश्य देख कर एक बात बोलना चाहूंगा मै, कि सुना है इंसानियत बिच रही है आजकल बाजारों में, लोग तो बस नफ़रत ही छपवा रहे है इश्तहारों में, अख़बारों में समाचारों में एक दूसरे के विचारो में, अंजानों में या यारो में लोग तो बस नफ़रत छपवा रहे है इश्तहारों में, इस वक़्त की गंभीरता ...