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मन के बोल।

उन पानी की लहरों को तो ज़रा देखो, वो लहरें कुछ कह रही हैं शायद ,बीते पल की यादें उनमें बह रही है,



आओ बैठो बात करो काफी परेशान से लगते हो लम्बे सफर के बाद थक कर आए मेहमान से लगते हो,



कुछ बातें करनी थी तुम्हे भी शायद, पर कुछ कह नहीं पा रहे हो शायद काफी दुख मिला है तुम्हे जिसे तुम सह नहीं पा रहे हो,



उठो चलो साथ आओ आज फिर एक नए सफर पर जाना है गैरो के दर्द को कब समझा ये ज़माना है,



वो बातें जिन्हे तुम आज भी याद करते हो वो बातें बड़ी पुरानी है दो लफ़्ज़ों की गुफ्तगू में लिखी तुमने कहानी है,



हिम्मत कर आगे बढ़ सब होगा फिर से ,ठीक पहुंचेगा तू मंज़िल पे तू है जीत के करीब,



ये बात ना किसी ने बोली है और ये बात ना कोई बोलेगा इस मतलब की दुनिया मै एक दिन तेरा नाम भी बोलेगा।

~Akrit

काफी वक़्त बाद आज ब्लॉग डाला है, कुछ थोड़ा अलग काम करना चाह रहे है जल्द बताएंगे और ब्लॉग आते रहेंगे जुड़े रहिए।

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