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रोता नहीं हूं।

आंखो में आंसू भरे है
पर मैं रोता नहीं हूं,

नींद आती है कभी कभी
पर मैं सोता नहीं हूं,

तुझे याद करता हूं रोज़ 
मगर तेरी यादों में खोता नहीं हूं,

इतना अकेलेपन भला कोई कैसे सहे
के तुझे देख तो लेता हूं रोज़ 
किसी के साथ जाते हुए,
पर कभी तेरे साथ मैं होता नहीं हूं,

मेरी आंखो की पलके गवाही नहीं करती प्यार का मेरे
क्योंकि दर्द खुद ही सेहलेता हूं मैं इन्हें भिगोता नहीं हूं,

आज फ़िर कहीं रास्ते में मिल जाओ तुम
इस उम्मीद में मैं कभी रास्तों पर खोता नहीं हूं

मेरी हालत से अंजान है परिवार मेरा
क्योंकि उनके साथ मैं रोज़ होता हूं पर
उनके साथ मैं कभी होता नहीं हूं,

अजीब सा हो गया है जीवन का ये सफ़र
कभी साथ चलता है ज़माना मेरे
कभी मैं होजाता हूं बिल्कुल अकेला
क्योंकि शायद किसी के साथ
मैं करता समझौता नहीं हूं,

आज तुम वादा करके गई हो कल मिलने आने का
इस खुशी में आज फिर रात को चलो मैं सोता नहीं हूं,
कितना पागल हूं उसके प्यार में ये देखो आप
की वो मुझे अपना बनाती नहीं हैं
और मैं किसीका होता नहीं हूं।

~Akrit

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यादें लेते आना।

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