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इंसान की इंसानियत।

देश गुजर रहा है इस वक़्त काफी मुश्किल घड़ी से , ये दिख गया है लोगो की बातों में,  ऐसा समय है चल रहा, जो नहीं है किसी सरकार के हांथों में, तभी डरे डरे से सहमे - सहमे से लोग रहते है आजकल दिन और रातों में, ये वक़्त मांगता है सबका साथ, तभी जीत पाएगा देश इस बार, पर पता नहीं क्या चल रहा है आजकल लोगों के विचारो में,  कोई कर रहा है राजनीति ,तो कोई कोस रहा है सरकार को कोई अपनी गलती मान ने से कर रहा है इंकार ,तो कोई गलत बातें सिखा रहा है लोगों को पढ़ के अखबार ,ये सब देख कर सोच में पड़ जाते है ,कि पता नहीं कोनसी गलत चीज़े इंसान सीख - पढ़ रहा है किताबो मै, इंसान इंसानियत ही भूल गया है ,मानो इस देश की संस्कृति को छोड़ वो कोषों दूर गया है, ये कैसा स्वभाव बना रहा है इंसान, कि मानो वो रहना भूल गया हो संस्कारो में, आज के समय का दृश्य देख कर एक बात बोलना चाहूंगा मै, कि सुना है इंसानियत बिच रही है आजकल बाजारों में, लोग तो बस नफ़रत ही छपवा रहे है इश्तहारों में, अख़बारों में समाचारों में एक दूसरे के विचारो में, अंजानों में या यारो में लोग तो बस नफ़रत छपवा रहे है इश्तहारों में, इस वक़्त की गंभीरता ...

मन के बोल।

उन पानी की लहरों को तो ज़रा देखो, वो लहरें कुछ कह रही हैं शायद ,बीते पल की यादें उनमें बह रही है, आओ बैठो बात करो काफी परेशान से लगते हो लम्बे सफर के बाद थक कर आए मेहमान से लगते हो, कुछ बातें करनी थी तुम्हे भी शायद, पर कुछ कह नहीं पा रहे हो शायद काफी दुख मिला है तुम्हे जिसे तुम सह नहीं पा रहे हो, उठो चलो साथ आओ आज फिर एक नए सफर पर जाना है गैरो के दर्द को कब समझा ये ज़माना है, वो बातें जिन्हे तुम आज भी याद करते हो वो बातें बड़ी पुरानी है दो लफ़्ज़ों की गुफ्तगू में लिखी तुमने कहानी है, हिम्मत कर आगे बढ़ सब होगा फिर से ,ठीक पहुंचेगा तू मंज़िल पे तू है जीत के करीब, ये बात ना किसी ने बोली है और ये बात ना कोई बोलेगा इस मतलब की दुनिया मै एक दिन तेरा नाम भी बोलेगा। ~Akrit काफी वक़्त बाद आज ब्लॉग डाला है, कुछ थोड़ा अलग काम करना चाह रहे है जल्द बताएंगे और ब्लॉग आते रहेंगे जुड़े रहिए। SOCIAL MEDIA.

तू और ये तेरी याद।

देखो आज ये साल भी बदल गया पर अब कोई फर्क नहीं लगता, ऐसा लगता है कैलेंडर में बस तारीक ही तो बदली है लोग वही है शहर वहीं है सब पुराना पहले जैसा ही तो है नहीं है तो बस अब तेरा मेरा साथ और रह गई है मेरे पास बस तेरी याद, मैं अभी भी वो पुराना वक़्त याद करता हूं और सोचता हूं कुछ तो था कुछ तो था तभी तो इतने वक़्त तक साथ थे वरना आजकल लोग रिश्ते भी कपड़ों की तरह बदलते है फिर लगता है कि वो कुछ भी शायद वक़्त के साथ कुछ नहीं मैं बदल गया कभी रातो को जागते हुए तुझसे बातें करता था वहीं आज रातों में अकेला रहता हूं ना नींद आती है ना तेरी याद जाती है, समझ नहीं पाता जिस रिश्ते को पाने के लिए इतना वक़्त और मेहनत लगाई उसके पास आने के बाद उसको मैं छोड़ क्यों दिया फिर लगता है हर रिश्ते की एक उम्र होती है और शायद हमारी इतनी ही थी, अब नहीं होती हमारी पहले जैसी लड़ाइयां अब नहीं होती हमारी पहले जैसे बात अब नहीं रोकता मैं अपनी गाड़ी तेरी गाड़ी को देखने के बाद अब नहीं थामता मैं वो तेरा हाथ अब बदल गया है सब कुछ और बदल गया है ये साल नहीं बदली तो बस तेरी याद, पर बोलू भी तो क्या तू तो लड़ी थी मुझसे की नहीं ख़तम करन...

हमारे अटल।

                                                         Photo Source-hellomumbainews.com  अटल बिहारी वाजपेयी(1924-2018) एक ऐसे नेता एक ऐसे कवि एक ऐसे व्यक्ति जो हर किसी के प्रिय थे, इन्होंने देश के विकास मै एक अहम भूमिका निभाई एक ऐसे व्यक्ति जो अपने फैसलों पर हमेशा टिके रहे यह देश के सबसे बड़े नेताओं मै से एक रहे है इन्हे हिन्दुस्तान की राजनीति का एक अहम हिस्सा मानाजाता है यह भारत रत्न और देश के प्रधानमंत्री भी रहे है और ये देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक भी रहे है, अटल जी एक ऐसे स्वभाव के व्यक्ति थे जो हर किसी के लिए प्रिय थे, एक बड़े नेता होने के साथ साथ वो एक कवि भी थे आज 25 दिसंबर उनके जन्मदिन के दिन मै उनकी कुछ मेरे पसंदीदा लेखन को आपके समक्ष प्रस्तुत करूंगा आइए साथ मिलकर अटल जी को उनके जन्मदिन पर याद करे। 1. मौत से ठन गई।                         ...

ज़िन्दगी- एक सफर।

मैं चल दिया हूं अकेला मंज़िल की ओर जाना कहा है रहना कहा है इसका नहीं है ठौर बस एक उम्मीद एक आशा है जीवन भर लोगो ने तो बस दी दिलासा है, हा चाहता हूं करना कुछ अलग हा चाहता हूं करना कुछ हटके काम ऐसा हो जो पूरी दुनिया मै चमके रखी खुधपर उम्मीद है हा लगाई खुद से एक आशा है हा होगे पूरे हर सपने मेरे ऐसे खुदको दी दिलासा है, हा है ये सफर कठिन हा रास्ते भी है बड़े लम्बे कई मुसाफ़िर पहले भी है इस सफर मै भटके पर खुदको किया इतना तैयार है कि लड़ना मुझे हर मुश्किल से आज है, हो कितनी भी बाधाए हार मै मानूंगा नहीं हो लम्बा कितना भी ये सफर पर रार मै ठानूंगा नहीं, नहीं जानता मै केसी बातें कोई भरता है किसी के कानों मै ये वही है जो जीवन भर खड़े है लम्बी कतारों में मेरा इनसे कोई सम्बंध नहीं ना कोई रिश्ता है एक चीज मै पूरा जीवन बांद दे? ऐसा इरादा किसका है, मै तो आगे भदूंगा दुनिया से लडूंगा सपना देखा है तो उसको पूरा करूंगा पीछे मै हटूंगा नहीं चाहें कोई भी मुश्किल आए मै डरूंगा नहीं, हा बहुत हुए है मेरे जैसे पहले भी ये जानता हूं मै पर अपने जैसा सिर्फ एक मै हूं ये बात मानता हूं मै, शूरवीर नहीं डरते छोटी मोटी बाधाओ...

वो और ये रास्ते।

उन रास्तों को छोड़ दिया जहां से कभी रोज़ जाया करते थे।  वो बाते बताना रोक दिया जो सबको सुनाया करते थे। तेरे दिल तक पहुंचना चाहता नहीं हूं अब, ये गलतियां कभी रोज़ दोहराया करते थे। तुझसे मोहब्बत आज भी है पर बताना नहीं है, क्योंकि कभी ये बोल कर अपना इश्क़ हम जताया करते थे। इन राहों पे अब डर लगता है जिन राहों से कभी आधी रात को यूहीं टेहेल कर गुजर जाया करते थे। वो नज़्में अब याद ही नहीं रहती जो कभी महफिलों मै सुनाया करते थे। प्यार की बाते होती नहीं अब हमसे, कभी बातों ही बातों मै शहर के मेहबूब बंजाया करते थे। उसकी सूरत पे अब प्यार नहीं आता जिसकी एक हसीं के लिए कभी दुनिया लुटाया करते थे। उससे बात करने की अब हिम्मत नहीं होती जिसको कभी बिना बात सताया करते थे। अब उसकी याद मै जाम उठाने का दिल नहीं करता जिसकी याद मै कभी बोतलें उड़ाया करते थे। ~Akrit If you do like my work then share and comment your thoughts.  Social handles

शहर में फिर चुनाव आ रहे है।

                                        Photo Source-Medium.com/Munner's Daily/@sangeeth_s माहौल बदलने लगा है इस शहर का हर जगह से आजकल बड़े बड़े  काफ़िले जा रहे है पूछा तो मालूम पड़ा कि नेताजी जनसंपर्क के लिए आ रहें है, जब बैठे देखा इस बड़े नेता को एक गरीब के यहां तो लगने लगा हमें भी की शायद शहर में फिर चुनाव आ रहे है,  रोज़ हो रही है विशाल रैलियां किए जा रहे है फिर नए वादे लोगो को भी लगने लगा है कि शायद काफी नेक है नेताजी के इरादे, फिर एक नए प्रत्याशी एक नए जोश के साथ चुनावी मैदान में आ रहे है लगता है शहर में फिर चुनाव आ रहे है, आधे कार्यकर्ता है पार्टी से नाराज़ कि मिली नहीं उनको टिकट इस बार तो वहीं आधो ने तो इस वजह से छोड़ दिया पार्टी का ही साथ,लगता है होने लगा है अब राजनीति में भी व्यापार, टिकट ना मिलने की वजह से कोई पुराने नेता पार्टी के खिलाफ खड़े होने जा रहा है लगता है शहर में फिर चुनाव आ रहे है, जगह जगह भीड़ लगी है रोज़ देर रात चल रही है सभाएं बैठकों ...