देखो आज ये साल भी बदल गया पर अब कोई फर्क नहीं लगता, ऐसा लगता है कैलेंडर में बस तारीक ही तो बदली है लोग वही है शहर वहीं है सब पुराना पहले जैसा ही तो है नहीं है तो बस अब तेरा मेरा साथ और रह गई है मेरे पास बस तेरी याद, मैं अभी भी वो पुराना वक़्त याद करता हूं और सोचता हूं कुछ तो था कुछ तो था तभी तो इतने वक़्त तक साथ थे वरना आजकल लोग रिश्ते भी कपड़ों की तरह बदलते है फिर लगता है कि वो कुछ भी शायद वक़्त के साथ कुछ नहीं मैं बदल गया कभी रातो को जागते हुए तुझसे बातें करता था वहीं आज रातों में अकेला रहता हूं ना नींद आती है ना तेरी याद जाती है, समझ नहीं पाता जिस रिश्ते को पाने के लिए इतना वक़्त और मेहनत लगाई उसके पास आने के बाद उसको मैं छोड़ क्यों दिया फिर लगता है हर रिश्ते की एक उम्र होती है और शायद हमारी इतनी ही थी, अब नहीं होती हमारी पहले जैसी लड़ाइयां अब नहीं होती हमारी पहले जैसे बात अब नहीं रोकता मैं अपनी गाड़ी तेरी गाड़ी को देखने के बाद अब नहीं थामता मैं वो तेरा हाथ अब बदल गया है सब कुछ और बदल गया है ये साल नहीं बदली तो बस तेरी याद, पर बोलू भी तो क्या तू तो लड़ी थी मुझसे की नहीं ख़तम करना इस रिश्ते को तूने कोशिश भी करी सब ठीक करने की मुझे ही शायद सब लगने लगा था ग़लत जो ख़तम किया मैं उस रिश्ते को जो था काफी अलग, अब बदलेगा समय हम शायद होगे किसी और के साथ शायद कोई और अब थामेगी आ-कर मेरा हाथ पर साथ रह जाएगी मेरे तेरी याद तेरी याद।
~Akrit
उम्मीद करता हूं आपको मेरा ये लेखन पसंद आया होगा कमेंट करके अपने विचार ज़रूर बताए।
👌👌
ReplyDeleteKya baata kya baat🌹
ReplyDeleteI'm waiting for your more blogs, why don't you write now? Kindly start posting again.
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