Skip to main content

Posts

मेरी किताब।

  Shabd Mala | शब्द माला: Shabd Mala Ek Vichaar (Hindi Edition) eBook : Jadoun, Akrit Singh: Amazon.in: Kindle Store नमस्कार, आज मैं अपनी किताब "शब्द माला" के बारे में कुछ शब्द लिखने आया हूं, मेरी ये किताब मैंने अभी कुछ वक़्त पहले ही प्रकाशित की हैं इसमें मेरे द्वारा लिखी हुई कुछ कविताएं , शायरियां, कहानियां लिखी हैं मैंने इस किताब में अपने सभी तरह के विचारों के बारे में लिखा हैं चाहे वो जीवन के उपर हो, प्यार के उपर हो, दर्द के उपर हो या चाहे राजनीति के उपर हो, हर तरह के विचारों के बारे में लिखने का प्रयास किया हैं, कोशिश की हैं मैंने की हर एक व्यक्ति जो मेरी ये किताब पढ़े उसे मैं हर पन्ने पर किसी नई कहानी से रूबरू करवा सकू, एक लेखक होने के तौर पर मैंने कोशिश करी हैं की कुछ इस तरह मैं अपने विचार दुनिया तक पहुंचा सकू की पढ़ने वालें कहीं ना कहीं उस बात को समझे और खुदको मेरी कविताओं से जोड़ सके, मैं आखिर में ये कहना चाहता हूं कि उम्मीद करूंगा आपको मेरी ये रचना पसंद आई होगी, मेरी किताब पढ़े और मुझे बताए आपके विचार मेरी किताब के बारे में, मैं अपने विचार यूहीं व्यक्त करता रहूंगा...

रोता नहीं हूं।

आंखो में आंसू भरे है पर मैं रोता नहीं हूं, नींद आती है कभी कभी पर मैं सोता नहीं हूं, तुझे याद करता हूं रोज़  मगर तेरी यादों में खोता नहीं हूं, इतना अकेलेपन भला कोई कैसे सहे के तुझे देख तो लेता हूं रोज़  किसी के साथ जाते हुए, पर कभी तेरे साथ मैं होता नहीं हूं, मेरी आंखो की पलके गवाही नहीं करती प्यार का मेरे क्योंकि दर्द खुद ही सेहलेता हूं मैं इन्हें भिगोता नहीं हूं, आज फ़िर कहीं रास्ते में मिल जाओ तुम इस उम्मीद में मैं कभी रास्तों पर खोता नहीं हूं मेरी हालत से अंजान है परिवार मेरा क्योंकि उनके साथ मैं रोज़ होता हूं पर उनके साथ मैं कभी होता नहीं हूं, अजीब सा हो गया है जीवन का ये सफ़र कभी साथ चलता है ज़माना मेरे कभी मैं होजाता हूं बिल्कुल अकेला क्योंकि शायद किसी के साथ मैं करता समझौता नहीं हूं, आज तुम वादा करके गई हो कल मिलने आने का इस खुशी में आज फिर रात को चलो मैं सोता नहीं हूं, कितना पागल हूं उसके प्यार में ये देखो आप की वो मुझे अपना बनाती नहीं हैं और मैं किसीका होता नहीं हूं। ~Akrit नया लेख पसंद आया हो तो ज़रूर बताना, कमेंट करके अपने विचार ज़रूर लिखिएगा। My Social/Work Links

सावरकर।

                                                  Photo Source-swarajyamag.com सावरकर माने तेज  सावरकर माने त्याग हैं, सावरकर एक ऐसा नाम जो इतिहास में शुमार हैं, सावरकर एक प्रेरणा हैं सावरकर एक उस्ताद हैं, सावरकर एक विचार हैं जिसपर सबके अपने अलग विचार हैं, सावरकर एक नेता हैं जो गंदी राजनीति के ख़िलाफ़ हैं, सावरकर एक उम्मीद हैं सावरकर कई लोगो की आस हैं, सावरकर एक स्वंत्रता वीर हैं जो देश को आज़ाद कराने में सबके साथ हैं, सावरकर एक देश प्रेमी हैं जो हर देशद्रोही के खिलाफ़ हैं, सावरकर के विचार आज भी, अंडमान की दीवारों की आवाज़ हैं, सावरकर ने कभी गलत का नहीं दिया साथ हैं, सावरकर आज भी हर इंसान की आवाज़ हैं, सावरकर एक प्रेरणा स्त्रोत हैं  कई युवाओं का विश्वास हैं, सावरकर ना मुझमें ना तुझमें करते वास हैं, सावरकर तो एक विचार हैं जो इस दुनिया में आज़ाद हैं। ~Akrit उम्मीद करूंगा आपको मेरी ये कोशिश पसंद आई हो, शुरुवाती 2 लाइनों की प्रेरणा मैंने अटल जी क...

वो मैं और चाय।

उसका साथ होना इतना ज़रूरी भी नहीं उसके होने का एहसास ही बहुत हैं, उससे मोहब्बत करने के लिए मुलाक़ात करना ज़रूरी नहीं उसको याद करने के लिए ये चाय का ग्लास ही बहुत हैं, मैं वो कहानी भूल कैसे जाऊ जो तू मुझे याद दिलाती रोज़ हैं, मैं तुझसे प्यार करना छोड़ कैसे दूं जब प्यार करने के लिए कोई नई वजह देजाती तू रोज़ हैं, वो पुरानी मुलाकातें  वो चाय की टपरी पे की थी जो बातें, उन सब बातों को याद रखने के लिए ये प्यार ही बहुत हैं, उसको याद करने के लिए ये चाय का ग्लास ही बहुत हैं,   ये सफ़र ख़तम नहीं हो रहा अकेला मुझसे शायद क्योंकि जीवन में आराम ही बहुत हैं, वो साथ होती आज तो चीज़े थोड़ी आसान होती मुझसे काम करवाने के लिए उसका प्यार ही बहुत हैं, पर जो भी हैं जैसा भी हैं उसका इंतज़ार आज भी बहुत हैं, वो चाय हमें बुलाती हैं आज भी उस शाम की चाय का एहसास ही बहुत हैं, आज वो साथ नहीं तो कोई बात नहीं ये शाम तो देखिए ये शाम सुहानी बहुत हैं, ये मौसम आज सुरूर दे रहा हैं, ये शाम बिताने के लिए चाय का ग्लास ही बहुत हैं। ~Akrit #InternationalTeaDay उम्मीद करूंगा लेख पसंद आया होगा अगर आया तो ज़रूर...

दुनिया की विचारधारा।

                                                                               इन अंधेरों में जीवन कटेगा कैसे कहीं से रोशनी तो लाइए, जो जले बस दिल की लौ से ऐसी कोई मोमबत्ती जलाईए, ये बातें अब झूठी लगती हैं इन को सच मान ने कि कोई वजह बताइए,  थोड़ी हमने करली आज थोड़ी मेहनत आप भी करके दिखाईए, ये दुनिया जिसको सब सही मानते हैं आप इसकी विचारधारा का विरोध करके बताइए,  ये बातें तो बहुत होती रहेगी कोई ठोस मुद्दा या सबूत हो तो दिखाईए, वो आदमी नाकारा हैं उससे कोई काम करवा कर दिखाईए,  ऐसा कोई बदलाव आप आज लोगो के जीवन में लाकर बताइए, ये कैसी हो चुकी हैं लोगो की सोच इस सोच को बदललिए लोगो को सही चीज सिखाइए,  एक बदलाव की ऐसी उम्मीद आप इस नगर में लाइए, वो अंधे भेरो की तरह लगे हैं भेड़ चाल में उनको सही राह दिखाईए,  इस अंधो की दुनिया में आज आप लोगो को सच्चाई की चश्मा पहनाइए। ~Akrit ल...

ये रातें और नींद।

                                           ये रातें अब ना जाने क्यों लंबी लगने लगी हैं, इन रातों में अब हमें नींद नहीं आती,  ये बातें जों सब कर रहे हैं ये बातें गंदी लगने लग गई हैं क्योंकि ये अब हमें समझ नहीं आती,  ये रोशनी इस रोशनी को बंद करदो इस रोशनी में अब कोई बात नहीं भाती,  ये अंधेरे ये अंधेरे अब अच्छे लगने लगे हैं शायद क्योंकि इन अंधेरों में तेरी यादें नहीं जाती, वो प्यार अब उस प्यार को याद करने का दिल नहीं करता शायद उस बेवफ़ा की बेवफ़ाई दिल से नहीं जाती, वो दोस्त वो दोस्त आज भी बहुत याद आते हैं क्योंकि उनके साथ बिताई कोई याद भुलाई नहीं जाती, वो काम वो काम तो अब करना ही छोड़ दिया जिस काम को करने से मेरी मां मुझसे रूठ जाती,  वो शराब वो शराब अब तो और ज्यादा चलती हैं क्योंकि उस शराब से दो पल की शांति हैं मिल जाती,  वो लम्हे वो लम्हे बिताने छोड़ दिए जिन लम्हों में ये ज़िन्दगी शायद कट जाती,  वो प्यार वो प्यार भी करना छोड़ दिया जिस प्यार को करके आख...

हम सबके प्रिय कवि दुष्यंत कुमार जी।

                                                                                                     Photo Source-duniyahaigol.com दुष्यंत कुमार (1933-1975) हिंदी जगत के महान कवियों में से एक हैं, जब भी कविता या ग़ज़ल का ज़िक्र होता है तो इनका नाम ज़रूर आता है कई बड़े कवि और नेता इनकी कविताएं ग़ज़लें कवि सम्मेलन, सभाओं मै सुनाते रहते हैं, हर लेखक इन्हे अपने जीवन का प्रेरणा स्त्रोत मानता हैं, ये कवि होने के साथ साथ कथाकार और गज़लकार भी थे इनकी लिखी हुई कई कविताएं ग़ज़लें आज के सिनेमा और गानों मै कई बार इस्तेमाल की जा चुकी हैं, आज इस महापुरुष की कुछ लेख हम आपके समक्ष रखने की कोशिश करेंगे, चलिए साथ मिलकर आज दुष्यंत कुमार जी के काम कि सराहना करते हुए उनको याद करते है। 1.) केसे मंज़र सामने आने लगे हैं। केसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते गाते ...