जीवन में किसी की कमी सी है
सांस चल तो रही है पर थमी सी है,
बेपनाह मोहब्बत करने की एक आस है
वो आस भी अब दबी सी है
जीवन में किसी की कमी सी है,
सुबह का सूरज देखे भी इतना वक़्त होगया है
की अब सूरज से भी बात कटी सी है
जीवन में किसी की कमी सी है,
रोज़ सोचता हूं कुछ काम करू तो दिमाग कहीं लगे
पर अब दिमागी गुफ्तुगी भी थमी सी है
जीवन में किसी की कमी सी है,
मै रोज़ बाहर जाता हूं खुदकी तलाश मै खुदको खोजने
लेकिन, लगता है मेरी खुदसे कोई दुश्मनी सी है
जीवन में किसी की कमी सी है,
अकेला पूरा दिन ख्यालों मै रहता हूं पर कुछ सोच नहीं पता
लगता है मेरे और मेरे ख्यालों के बीच कोई दरार पड़ी सी है
जीवन में किसी की कमी सी है,
सोचता हूं लिख दू हर दुख हर परेशानी हर बात का सच पर, शायद सच की और मेरी मुलाक़ात मै अभी एक सदी बची सी है,
जीवन में किसी की कमी सी है कमी सी है।
~Akrit
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बहुत शानदार शब्दों का उपयोग
ReplyDelete❤️
Deletewell done son!
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