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शहर में फिर चुनाव आ रहे है।

 

                                      Photo Source-Medium.com/Munner's Daily/@sangeeth_s

माहौल बदलने लगा है इस शहर का हर जगह से आजकल बड़े बड़े  काफ़िले जा रहे है पूछा तो मालूम पड़ा कि नेताजी जनसंपर्क के लिए आ रहें है, जब बैठे देखा इस बड़े नेता को एक गरीब के यहां तो लगने लगा हमें भी की शायद शहर में फिर चुनाव आ रहे है,


 रोज़ हो रही है विशाल रैलियां किए जा रहे है फिर नए वादे लोगो को भी लगने लगा है कि शायद काफी नेक है नेताजी के इरादे, फिर एक नए प्रत्याशी एक नए जोश के साथ चुनावी मैदान में आ रहे है लगता है शहर में फिर चुनाव आ रहे है,


आधे कार्यकर्ता है पार्टी से नाराज़ कि मिली नहीं उनको टिकट इस बार तो वहीं आधो ने तो इस वजह से छोड़ दिया पार्टी का ही साथ,लगता है होने लगा है अब राजनीति में भी व्यापार, टिकट ना मिलने की वजह से कोई पुराने नेता पार्टी के खिलाफ खड़े होने जा रहा है लगता है शहर में फिर चुनाव आ रहे है,


जगह जगह भीड़ लगी है रोज़ देर रात चल रही है सभाएं बैठकों में चुनाव की हो रही है चर्चाएं कोन जीतेगा कोन हारेगा कुछ पता नहीं यहां किसी के एक नेता से सम्बन्ध अच्छे है तो वहीं दूसरे ने भी वेहवार भड़ाने का मौका छोड़ा  नहीं, सब चिंतित है सब विचार कर रहे है क्या होगा आगे? बना पाएंगे सरकार या फिर बैठेंगे विपक्ष में 5 साल, ऐसे विचार- विमस कर नागरिक मतदान के लिए जा रहे है लगता है शहर में फिर चुनाव आ रहे है।


~Akrit

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यादें लेते आना।

सुना है तुम वापिस आरहे हो? अच्छा तो सुनो आते वक़्त एक काम करते आना  जो यादें हमने साथ बिताई थी वो यादें लेते आना, क्या है की थक गया हूं मै दिल को समझाते समझाते  यह पागल आज भी तेरे लिए पागल है, इस पागल दिल  की दवा लेते आना, सुनो आरहे हो तो आते आते यादें लेते आना, आज तुम्हे गए हुए एक अरसा बीत गया है और इस दौरान मुझे छोड़के हर चीज बदल गई है, अब मेरे लिए भी बदलाव की एक उमीद लेते आना, सुनो आरहे हो तो आते आते यादें लेते आना, क्या है की बदलना हम भी चाहते थे पर बदल नहीं पाए तुझे छोड़ना चाहते थे पर छोड़ नहीं पाए आज तेरे बिना दिल इतना अकेला पड़ गया है की कोई साथी नहीं है, इस दिल को बहलाने   के लिए एक खिलौना लेते आना, सुनो आरहे हो तो आते आते यादें लेते आना यादें लेते आना। -Akrit

ये आंसू।

 ये आंसू भी अब पलकों पे आते नही हैं देखो ना अब लोग मुझे तुम्हारे नाम से सताते नहीं हैं अब नही होता कोई दिन हसीन अब कोई पक्षी मेरे द्वार पर आ कर गाते नहीं हैं रात में बाहर ही रहता हूं अब मैं क्योंकि नींद लेने से डरने लगा हूं क्योंकि ये नींद के वक्त के सपने इन सपनों में भी हम साथ नजर अब आते नहीं हैं जो तुझे झुमके दिए थे मैंने कभी सुना है वैसे झुमके अब वो बनाते नही हैं महफिलों में बदनाम हो गया है अब हमारा नाम क्योंकि शराब पीके भी अब हम शायरी किसीको सुनाते नही हैं आज अनजाने में तेरे घर के सामने से निकलना हुआ देखा के जो फूल तू अपने बालों में लगाता था वो फूल भी अब तेरे बगीचे में नजर आते नही हैं तुझपे तो आज भी मेला लगा होगा ना लोगो का एक हम ही हैं जो किसीको पसंद आते नही हैं। ~Akrit 

तेरी यादें।

 मै एक मुसाफ़िर हूं जो तेरी गली मै आके भटकता है पता नहीं क्यों आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है, तेरे जाने के बाद कई लोग आए कई रिश्ते बनाए, पर पता नहीं क्यों वो रात का अकेलापन मुझे अंदर ही अंदर खटकता है आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है, की मै हूं वही पर वो बात नहीं है मेरे हाथो मै जो तेरा हाथ नहीं है, तुझे किसी और के साथ देख मन अभी भी मचलता है आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है, वो शामे याद है मुझे जो तेरे साथ गुजारी थी मै बहुत खुश था और ज़िंदगी बड़ी सुहानी थी, अब शाम मै भी वो बात नहीं जो तू मेरे साथ नहीं, बिना बात कभी - कभी रोता हूं मै क्योंकि इश्क़ मै खा चुका धोका हूं मै, ऐसे ही एक आशिक़  अपने प्यार के दीदार को तरस्ता है आज भी दिल तेरी यादों मै तड़पता है तेरी यादों मै तड़पता है। -Akrit . My Social Handles(TAP THIS)