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वो और ये रास्ते।

उन रास्तों को छोड़ दिया जहां से कभी रोज़ जाया करते थे।
 वो बाते बताना रोक दिया जो सबको सुनाया करते थे।

तेरे दिल तक पहुंचना चाहता नहीं हूं अब, ये गलतियां कभी रोज़ दोहराया करते थे।
तुझसे मोहब्बत आज भी है पर बताना नहीं है, क्योंकि कभी ये बोल कर अपना इश्क़ हम जताया करते थे।

इन राहों पे अब डर लगता है जिन राहों से कभी आधी रात को यूहीं टेहेल कर गुजर जाया करते थे।
वो नज़्में अब याद ही नहीं रहती जो कभी महफिलों मै सुनाया करते थे।

प्यार की बाते होती नहीं अब हमसे, कभी बातों ही बातों मै शहर के मेहबूब बंजाया करते थे।
उसकी सूरत पे अब प्यार नहीं आता जिसकी एक हसीं के लिए कभी दुनिया लुटाया करते थे।

उससे बात करने की अब हिम्मत नहीं होती जिसको कभी बिना बात सताया करते थे।
अब उसकी याद मै जाम उठाने का दिल नहीं करता जिसकी याद मै कभी बोतलें उड़ाया करते थे।

~Akrit

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