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ज़िन्दगी- एक सफर।

मैं चल दिया हूं अकेला मंज़िल की ओर जाना कहा है रहना कहा है इसका नहीं है ठौर बस एक उम्मीद एक आशा है जीवन भर लोगो ने तो बस दी दिलासा है, हा चाहता हूं करना कुछ अलग हा चाहता हूं करना कुछ हटके काम ऐसा हो जो पूरी दुनिया मै चमके रखी खुधपर उम्मीद है हा लगाई खुद से एक आशा है हा होगे पूरे हर सपने मेरे ऐसे खुदको दी दिलासा है, हा है ये सफर कठिन हा रास्ते भी है बड़े लम्बे कई मुसाफ़िर पहले भी है इस सफर मै भटके पर खुदको किया इतना तैयार है कि लड़ना मुझे हर मुश्किल से आज है, हो कितनी भी बाधाए हार मै मानूंगा नहीं हो लम्बा कितना भी ये सफर पर रार मै ठानूंगा नहीं, नहीं जानता मै केसी बातें कोई भरता है किसी के कानों मै ये वही है जो जीवन भर खड़े है लम्बी कतारों में मेरा इनसे कोई सम्बंध नहीं ना कोई रिश्ता है एक चीज मै पूरा जीवन बांद दे? ऐसा इरादा किसका है, मै तो आगे भदूंगा दुनिया से लडूंगा सपना देखा है तो उसको पूरा करूंगा पीछे मै हटूंगा नहीं चाहें कोई भी मुश्किल आए मै डरूंगा नहीं, हा बहुत हुए है मेरे जैसे पहले भी ये जानता हूं मै पर अपने जैसा सिर्फ एक मै हूं ये बात मानता हूं मै, शूरवीर नहीं डरते छोटी मोटी बाधाओं से फिर भले ही वो टकराए बिन मांगी बैठक - सभाओं से, ये सफर है कठिन पर उसका भी एक अपना मज़ा है हर रास्ते पे जीवन ने एक नई जीत का स्वाद चखा है, हा ये सफर जल्द होगा खत्म फिर पाएगा तू मंज़िल को जो सपना तूने देखा था हा होगा वो साकार एक वक़्त के बाद हा तू भी लिखदे का इतिहास तो संघर्ष कर हा मेहनत कर हा पा ले हर उस चीज को ये सफर एक दिन होगा खत्म जब पाएगा तू उस जीत को।

~Akrit

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