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ये आंसू।

 ये आंसू भी अब पलकों पे आते नही हैं देखो ना अब लोग मुझे तुम्हारे नाम से सताते नहीं हैं अब नही होता कोई दिन हसीन अब कोई पक्षी मेरे द्वार पर आ कर गाते नहीं हैं रात में बाहर ही रहता हूं अब मैं क्योंकि नींद लेने से डरने लगा हूं क्योंकि ये नींद के वक्त के सपने इन सपनों में भी हम साथ नजर अब आते नहीं हैं जो तुझे झुमके दिए थे मैंने कभी सुना है वैसे झुमके अब वो बनाते नही हैं महफिलों में बदनाम हो गया है अब हमारा नाम क्योंकि शराब पीके भी अब हम शायरी किसीको सुनाते नही हैं आज अनजाने में तेरे घर के सामने से निकलना हुआ देखा के जो फूल तू अपने बालों में लगाता था वो फूल भी अब तेरे बगीचे में नजर आते नही हैं तुझपे तो आज भी मेला लगा होगा ना लोगो का एक हम ही हैं जो किसीको पसंद आते नही हैं। ~Akrit 

तेरा जाना।

तेरा जाना कोई इत्तेफ़ाक तो ना था हमारा यूं मिलना कोई ख़्वाब तो ना था, जाना तेरा दर्दों का महल था कोई हसीन बाग तो ना था, याद तो बहुत आएं तुम हमे पर इन यादों में तू हमारे साथ तो ना था, मान जाते हम भी के मुकम्मल नहीं तो क्या हुआ प्यार हमारा भी सच्चा था, लेकिन हमारे जाने के बाद भी तू अकेला कोई शाम तो ना था, सब कहते रहें की ख़तम कर सही नहीं है ये पर हमने किसी की एक ना सुनी अंत में सच हुई सब बातें के मानो साबित करना चाहता था तू, के तेरे मुंह से निकला हर बोल बस एक बोल था सच की कोई किताब तो ना था, प्यार मेरा सच्चा था हर मुलाक़ात में हर एहसास में इश्क़ मेरा पक्का था, पर आज एक बात सच तू भी बोल दे के हर मुलाक़ात में रातों की लम्बी बात में तू मेरे साथ था पर मेरे पास तो ना था, बर्बादी के अंत पर आ चुके है अब रोज़ पूछते है खुद से के ऐसे जीवन निकालने का मेरा कोई ख्वाब तो ना था, किसी रोज़ आके देख कर जाना मेरी हालत फिर पूछना एक बार खुद से कहीं ये खिलोना कोई इंसान तो ना था। ~Akrit मेरी किताब/My Book. My Social/Work

मेरी किताब।

  Shabd Mala | शब्द माला: Shabd Mala Ek Vichaar (Hindi Edition) eBook : Jadoun, Akrit Singh: Amazon.in: Kindle Store नमस्कार, आज मैं अपनी किताब "शब्द माला" के बारे में कुछ शब्द लिखने आया हूं, मेरी ये किताब मैंने अभी कुछ वक़्त पहले ही प्रकाशित की हैं इसमें मेरे द्वारा लिखी हुई कुछ कविताएं , शायरियां, कहानियां लिखी हैं मैंने इस किताब में अपने सभी तरह के विचारों के बारे में लिखा हैं चाहे वो जीवन के उपर हो, प्यार के उपर हो, दर्द के उपर हो या चाहे राजनीति के उपर हो, हर तरह के विचारों के बारे में लिखने का प्रयास किया हैं, कोशिश की हैं मैंने की हर एक व्यक्ति जो मेरी ये किताब पढ़े उसे मैं हर पन्ने पर किसी नई कहानी से रूबरू करवा सकू, एक लेखक होने के तौर पर मैंने कोशिश करी हैं की कुछ इस तरह मैं अपने विचार दुनिया तक पहुंचा सकू की पढ़ने वालें कहीं ना कहीं उस बात को समझे और खुदको मेरी कविताओं से जोड़ सके, मैं आखिर में ये कहना चाहता हूं कि उम्मीद करूंगा आपको मेरी ये रचना पसंद आई होगी, मेरी किताब पढ़े और मुझे बताए आपके विचार मेरी किताब के बारे में, मैं अपने विचार यूहीं व्यक्त करता रहूंगा...

रोता नहीं हूं।

आंखो में आंसू भरे है पर मैं रोता नहीं हूं, नींद आती है कभी कभी पर मैं सोता नहीं हूं, तुझे याद करता हूं रोज़  मगर तेरी यादों में खोता नहीं हूं, इतना अकेलेपन भला कोई कैसे सहे के तुझे देख तो लेता हूं रोज़  किसी के साथ जाते हुए, पर कभी तेरे साथ मैं होता नहीं हूं, मेरी आंखो की पलके गवाही नहीं करती प्यार का मेरे क्योंकि दर्द खुद ही सेहलेता हूं मैं इन्हें भिगोता नहीं हूं, आज फ़िर कहीं रास्ते में मिल जाओ तुम इस उम्मीद में मैं कभी रास्तों पर खोता नहीं हूं मेरी हालत से अंजान है परिवार मेरा क्योंकि उनके साथ मैं रोज़ होता हूं पर उनके साथ मैं कभी होता नहीं हूं, अजीब सा हो गया है जीवन का ये सफ़र कभी साथ चलता है ज़माना मेरे कभी मैं होजाता हूं बिल्कुल अकेला क्योंकि शायद किसी के साथ मैं करता समझौता नहीं हूं, आज तुम वादा करके गई हो कल मिलने आने का इस खुशी में आज फिर रात को चलो मैं सोता नहीं हूं, कितना पागल हूं उसके प्यार में ये देखो आप की वो मुझे अपना बनाती नहीं हैं और मैं किसीका होता नहीं हूं। ~Akrit नया लेख पसंद आया हो तो ज़रूर बताना, कमेंट करके अपने विचार ज़रूर लिखिएगा। My Social/Work Links

सावरकर।

                                                  Photo Source-swarajyamag.com सावरकर माने तेज  सावरकर माने त्याग हैं, सावरकर एक ऐसा नाम जो इतिहास में शुमार हैं, सावरकर एक प्रेरणा हैं सावरकर एक उस्ताद हैं, सावरकर एक विचार हैं जिसपर सबके अपने अलग विचार हैं, सावरकर एक नेता हैं जो गंदी राजनीति के ख़िलाफ़ हैं, सावरकर एक उम्मीद हैं सावरकर कई लोगो की आस हैं, सावरकर एक स्वंत्रता वीर हैं जो देश को आज़ाद कराने में सबके साथ हैं, सावरकर एक देश प्रेमी हैं जो हर देशद्रोही के खिलाफ़ हैं, सावरकर के विचार आज भी, अंडमान की दीवारों की आवाज़ हैं, सावरकर ने कभी गलत का नहीं दिया साथ हैं, सावरकर आज भी हर इंसान की आवाज़ हैं, सावरकर एक प्रेरणा स्त्रोत हैं  कई युवाओं का विश्वास हैं, सावरकर ना मुझमें ना तुझमें करते वास हैं, सावरकर तो एक विचार हैं जो इस दुनिया में आज़ाद हैं। ~Akrit उम्मीद करूंगा आपको मेरी ये कोशिश पसंद आई हो, शुरुवाती 2 लाइनों की प्रेरणा मैंने अटल जी क...

वो मैं और चाय।

उसका साथ होना इतना ज़रूरी भी नहीं उसके होने का एहसास ही बहुत हैं, उससे मोहब्बत करने के लिए मुलाक़ात करना ज़रूरी नहीं उसको याद करने के लिए ये चाय का ग्लास ही बहुत हैं, मैं वो कहानी भूल कैसे जाऊ जो तू मुझे याद दिलाती रोज़ हैं, मैं तुझसे प्यार करना छोड़ कैसे दूं जब प्यार करने के लिए कोई नई वजह देजाती तू रोज़ हैं, वो पुरानी मुलाकातें  वो चाय की टपरी पे की थी जो बातें, उन सब बातों को याद रखने के लिए ये प्यार ही बहुत हैं, उसको याद करने के लिए ये चाय का ग्लास ही बहुत हैं,   ये सफ़र ख़तम नहीं हो रहा अकेला मुझसे शायद क्योंकि जीवन में आराम ही बहुत हैं, वो साथ होती आज तो चीज़े थोड़ी आसान होती मुझसे काम करवाने के लिए उसका प्यार ही बहुत हैं, पर जो भी हैं जैसा भी हैं उसका इंतज़ार आज भी बहुत हैं, वो चाय हमें बुलाती हैं आज भी उस शाम की चाय का एहसास ही बहुत हैं, आज वो साथ नहीं तो कोई बात नहीं ये शाम तो देखिए ये शाम सुहानी बहुत हैं, ये मौसम आज सुरूर दे रहा हैं, ये शाम बिताने के लिए चाय का ग्लास ही बहुत हैं। ~Akrit #InternationalTeaDay उम्मीद करूंगा लेख पसंद आया होगा अगर आया तो ज़रूर...

दुनिया की विचारधारा।

                                                                               इन अंधेरों में जीवन कटेगा कैसे कहीं से रोशनी तो लाइए, जो जले बस दिल की लौ से ऐसी कोई मोमबत्ती जलाईए, ये बातें अब झूठी लगती हैं इन को सच मान ने कि कोई वजह बताइए,  थोड़ी हमने करली आज थोड़ी मेहनत आप भी करके दिखाईए, ये दुनिया जिसको सब सही मानते हैं आप इसकी विचारधारा का विरोध करके बताइए,  ये बातें तो बहुत होती रहेगी कोई ठोस मुद्दा या सबूत हो तो दिखाईए, वो आदमी नाकारा हैं उससे कोई काम करवा कर दिखाईए,  ऐसा कोई बदलाव आप आज लोगो के जीवन में लाकर बताइए, ये कैसी हो चुकी हैं लोगो की सोच इस सोच को बदललिए लोगो को सही चीज सिखाइए,  एक बदलाव की ऐसी उम्मीद आप इस नगर में लाइए, वो अंधे भेरो की तरह लगे हैं भेड़ चाल में उनको सही राह दिखाईए,  इस अंधो की दुनिया में आज आप लोगो को सच्चाई की चश्मा पहनाइए। ~Akrit ल...

ये रातें और नींद।

                                           ये रातें अब ना जाने क्यों लंबी लगने लगी हैं, इन रातों में अब हमें नींद नहीं आती,  ये बातें जों सब कर रहे हैं ये बातें गंदी लगने लग गई हैं क्योंकि ये अब हमें समझ नहीं आती,  ये रोशनी इस रोशनी को बंद करदो इस रोशनी में अब कोई बात नहीं भाती,  ये अंधेरे ये अंधेरे अब अच्छे लगने लगे हैं शायद क्योंकि इन अंधेरों में तेरी यादें नहीं जाती, वो प्यार अब उस प्यार को याद करने का दिल नहीं करता शायद उस बेवफ़ा की बेवफ़ाई दिल से नहीं जाती, वो दोस्त वो दोस्त आज भी बहुत याद आते हैं क्योंकि उनके साथ बिताई कोई याद भुलाई नहीं जाती, वो काम वो काम तो अब करना ही छोड़ दिया जिस काम को करने से मेरी मां मुझसे रूठ जाती,  वो शराब वो शराब अब तो और ज्यादा चलती हैं क्योंकि उस शराब से दो पल की शांति हैं मिल जाती,  वो लम्हे वो लम्हे बिताने छोड़ दिए जिन लम्हों में ये ज़िन्दगी शायद कट जाती,  वो प्यार वो प्यार भी करना छोड़ दिया जिस प्यार को करके आख...

हम सबके प्रिय कवि दुष्यंत कुमार जी।

                                                                                                     Photo Source-duniyahaigol.com दुष्यंत कुमार (1933-1975) हिंदी जगत के महान कवियों में से एक हैं, जब भी कविता या ग़ज़ल का ज़िक्र होता है तो इनका नाम ज़रूर आता है कई बड़े कवि और नेता इनकी कविताएं ग़ज़लें कवि सम्मेलन, सभाओं मै सुनाते रहते हैं, हर लेखक इन्हे अपने जीवन का प्रेरणा स्त्रोत मानता हैं, ये कवि होने के साथ साथ कथाकार और गज़लकार भी थे इनकी लिखी हुई कई कविताएं ग़ज़लें आज के सिनेमा और गानों मै कई बार इस्तेमाल की जा चुकी हैं, आज इस महापुरुष की कुछ लेख हम आपके समक्ष रखने की कोशिश करेंगे, चलिए साथ मिलकर आज दुष्यंत कुमार जी के काम कि सराहना करते हुए उनको याद करते है। 1.) केसे मंज़र सामने आने लगे हैं। केसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते गाते ...

इंसान की इंसानियत।

देश गुजर रहा है इस वक़्त काफी मुश्किल घड़ी से , ये दिख गया है लोगो की बातों में,  ऐसा समय है चल रहा, जो नहीं है किसी सरकार के हांथों में, तभी डरे डरे से सहमे - सहमे से लोग रहते है आजकल दिन और रातों में, ये वक़्त मांगता है सबका साथ, तभी जीत पाएगा देश इस बार, पर पता नहीं क्या चल रहा है आजकल लोगों के विचारो में,  कोई कर रहा है राजनीति ,तो कोई कोस रहा है सरकार को कोई अपनी गलती मान ने से कर रहा है इंकार ,तो कोई गलत बातें सिखा रहा है लोगों को पढ़ के अखबार ,ये सब देख कर सोच में पड़ जाते है ,कि पता नहीं कोनसी गलत चीज़े इंसान सीख - पढ़ रहा है किताबो मै, इंसान इंसानियत ही भूल गया है ,मानो इस देश की संस्कृति को छोड़ वो कोषों दूर गया है, ये कैसा स्वभाव बना रहा है इंसान, कि मानो वो रहना भूल गया हो संस्कारो में, आज के समय का दृश्य देख कर एक बात बोलना चाहूंगा मै, कि सुना है इंसानियत बिच रही है आजकल बाजारों में, लोग तो बस नफ़रत ही छपवा रहे है इश्तहारों में, अख़बारों में समाचारों में एक दूसरे के विचारो में, अंजानों में या यारो में लोग तो बस नफ़रत छपवा रहे है इश्तहारों में, इस वक़्त की गंभीरता ...

मन के बोल।

उन पानी की लहरों को तो ज़रा देखो, वो लहरें कुछ कह रही हैं शायद ,बीते पल की यादें उनमें बह रही है, आओ बैठो बात करो काफी परेशान से लगते हो लम्बे सफर के बाद थक कर आए मेहमान से लगते हो, कुछ बातें करनी थी तुम्हे भी शायद, पर कुछ कह नहीं पा रहे हो शायद काफी दुख मिला है तुम्हे जिसे तुम सह नहीं पा रहे हो, उठो चलो साथ आओ आज फिर एक नए सफर पर जाना है गैरो के दर्द को कब समझा ये ज़माना है, वो बातें जिन्हे तुम आज भी याद करते हो वो बातें बड़ी पुरानी है दो लफ़्ज़ों की गुफ्तगू में लिखी तुमने कहानी है, हिम्मत कर आगे बढ़ सब होगा फिर से ,ठीक पहुंचेगा तू मंज़िल पे तू है जीत के करीब, ये बात ना किसी ने बोली है और ये बात ना कोई बोलेगा इस मतलब की दुनिया मै एक दिन तेरा नाम भी बोलेगा। ~Akrit काफी वक़्त बाद आज ब्लॉग डाला है, कुछ थोड़ा अलग काम करना चाह रहे है जल्द बताएंगे और ब्लॉग आते रहेंगे जुड़े रहिए। SOCIAL MEDIA.

तू और ये तेरी याद।

देखो आज ये साल भी बदल गया पर अब कोई फर्क नहीं लगता, ऐसा लगता है कैलेंडर में बस तारीक ही तो बदली है लोग वही है शहर वहीं है सब पुराना पहले जैसा ही तो है नहीं है तो बस अब तेरा मेरा साथ और रह गई है मेरे पास बस तेरी याद, मैं अभी भी वो पुराना वक़्त याद करता हूं और सोचता हूं कुछ तो था कुछ तो था तभी तो इतने वक़्त तक साथ थे वरना आजकल लोग रिश्ते भी कपड़ों की तरह बदलते है फिर लगता है कि वो कुछ भी शायद वक़्त के साथ कुछ नहीं मैं बदल गया कभी रातो को जागते हुए तुझसे बातें करता था वहीं आज रातों में अकेला रहता हूं ना नींद आती है ना तेरी याद जाती है, समझ नहीं पाता जिस रिश्ते को पाने के लिए इतना वक़्त और मेहनत लगाई उसके पास आने के बाद उसको मैं छोड़ क्यों दिया फिर लगता है हर रिश्ते की एक उम्र होती है और शायद हमारी इतनी ही थी, अब नहीं होती हमारी पहले जैसी लड़ाइयां अब नहीं होती हमारी पहले जैसे बात अब नहीं रोकता मैं अपनी गाड़ी तेरी गाड़ी को देखने के बाद अब नहीं थामता मैं वो तेरा हाथ अब बदल गया है सब कुछ और बदल गया है ये साल नहीं बदली तो बस तेरी याद, पर बोलू भी तो क्या तू तो लड़ी थी मुझसे की नहीं ख़तम करन...

हमारे अटल।

                                                         Photo Source-hellomumbainews.com  अटल बिहारी वाजपेयी(1924-2018) एक ऐसे नेता एक ऐसे कवि एक ऐसे व्यक्ति जो हर किसी के प्रिय थे, इन्होंने देश के विकास मै एक अहम भूमिका निभाई एक ऐसे व्यक्ति जो अपने फैसलों पर हमेशा टिके रहे यह देश के सबसे बड़े नेताओं मै से एक रहे है इन्हे हिन्दुस्तान की राजनीति का एक अहम हिस्सा मानाजाता है यह भारत रत्न और देश के प्रधानमंत्री भी रहे है और ये देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक भी रहे है, अटल जी एक ऐसे स्वभाव के व्यक्ति थे जो हर किसी के लिए प्रिय थे, एक बड़े नेता होने के साथ साथ वो एक कवि भी थे आज 25 दिसंबर उनके जन्मदिन के दिन मै उनकी कुछ मेरे पसंदीदा लेखन को आपके समक्ष प्रस्तुत करूंगा आइए साथ मिलकर अटल जी को उनके जन्मदिन पर याद करे। 1. मौत से ठन गई।                         ...

ज़िन्दगी- एक सफर।

मैं चल दिया हूं अकेला मंज़िल की ओर जाना कहा है रहना कहा है इसका नहीं है ठौर बस एक उम्मीद एक आशा है जीवन भर लोगो ने तो बस दी दिलासा है, हा चाहता हूं करना कुछ अलग हा चाहता हूं करना कुछ हटके काम ऐसा हो जो पूरी दुनिया मै चमके रखी खुधपर उम्मीद है हा लगाई खुद से एक आशा है हा होगे पूरे हर सपने मेरे ऐसे खुदको दी दिलासा है, हा है ये सफर कठिन हा रास्ते भी है बड़े लम्बे कई मुसाफ़िर पहले भी है इस सफर मै भटके पर खुदको किया इतना तैयार है कि लड़ना मुझे हर मुश्किल से आज है, हो कितनी भी बाधाए हार मै मानूंगा नहीं हो लम्बा कितना भी ये सफर पर रार मै ठानूंगा नहीं, नहीं जानता मै केसी बातें कोई भरता है किसी के कानों मै ये वही है जो जीवन भर खड़े है लम्बी कतारों में मेरा इनसे कोई सम्बंध नहीं ना कोई रिश्ता है एक चीज मै पूरा जीवन बांद दे? ऐसा इरादा किसका है, मै तो आगे भदूंगा दुनिया से लडूंगा सपना देखा है तो उसको पूरा करूंगा पीछे मै हटूंगा नहीं चाहें कोई भी मुश्किल आए मै डरूंगा नहीं, हा बहुत हुए है मेरे जैसे पहले भी ये जानता हूं मै पर अपने जैसा सिर्फ एक मै हूं ये बात मानता हूं मै, शूरवीर नहीं डरते छोटी मोटी बाधाओ...

वो और ये रास्ते।

उन रास्तों को छोड़ दिया जहां से कभी रोज़ जाया करते थे।  वो बाते बताना रोक दिया जो सबको सुनाया करते थे। तेरे दिल तक पहुंचना चाहता नहीं हूं अब, ये गलतियां कभी रोज़ दोहराया करते थे। तुझसे मोहब्बत आज भी है पर बताना नहीं है, क्योंकि कभी ये बोल कर अपना इश्क़ हम जताया करते थे। इन राहों पे अब डर लगता है जिन राहों से कभी आधी रात को यूहीं टेहेल कर गुजर जाया करते थे। वो नज़्में अब याद ही नहीं रहती जो कभी महफिलों मै सुनाया करते थे। प्यार की बाते होती नहीं अब हमसे, कभी बातों ही बातों मै शहर के मेहबूब बंजाया करते थे। उसकी सूरत पे अब प्यार नहीं आता जिसकी एक हसीं के लिए कभी दुनिया लुटाया करते थे। उससे बात करने की अब हिम्मत नहीं होती जिसको कभी बिना बात सताया करते थे। अब उसकी याद मै जाम उठाने का दिल नहीं करता जिसकी याद मै कभी बोतलें उड़ाया करते थे। ~Akrit If you do like my work then share and comment your thoughts.  Social handles

शहर में फिर चुनाव आ रहे है।

                                        Photo Source-Medium.com/Munner's Daily/@sangeeth_s माहौल बदलने लगा है इस शहर का हर जगह से आजकल बड़े बड़े  काफ़िले जा रहे है पूछा तो मालूम पड़ा कि नेताजी जनसंपर्क के लिए आ रहें है, जब बैठे देखा इस बड़े नेता को एक गरीब के यहां तो लगने लगा हमें भी की शायद शहर में फिर चुनाव आ रहे है,  रोज़ हो रही है विशाल रैलियां किए जा रहे है फिर नए वादे लोगो को भी लगने लगा है कि शायद काफी नेक है नेताजी के इरादे, फिर एक नए प्रत्याशी एक नए जोश के साथ चुनावी मैदान में आ रहे है लगता है शहर में फिर चुनाव आ रहे है, आधे कार्यकर्ता है पार्टी से नाराज़ कि मिली नहीं उनको टिकट इस बार तो वहीं आधो ने तो इस वजह से छोड़ दिया पार्टी का ही साथ,लगता है होने लगा है अब राजनीति में भी व्यापार, टिकट ना मिलने की वजह से कोई पुराने नेता पार्टी के खिलाफ खड़े होने जा रहा है लगता है शहर में फिर चुनाव आ रहे है, जगह जगह भीड़ लगी है रोज़ देर रात चल रही है सभाएं बैठकों ...

जीवन में किसी की कमी सी है।

जीवन में किसी की कमी सी है सांस चल तो रही है पर थमी सी है, बेपनाह मोहब्बत करने की एक आस है वो आस भी अब दबी सी है जीवन में किसी की कमी सी है, सुबह का सूरज देखे भी इतना वक़्त होगया है की अब सूरज से भी बात कटी सी है जीवन में किसी की कमी सी है, रोज़ सोचता हूं कुछ काम करू तो दिमाग कहीं लगे पर अब दिमागी गुफ्तुगी भी थमी सी है जीवन में किसी की कमी सी है, मै रोज़ बाहर जाता हूं खुदकी तलाश मै खुदको खोजने लेकिन, लगता है मेरी खुदसे कोई दुश्मनी सी है जीवन में किसी की कमी सी है, अकेला पूरा दिन ख्यालों मै रहता हूं पर कुछ सोच नहीं पता लगता है मेरे और मेरे ख्यालों के बीच कोई दरार पड़ी सी है जीवन में किसी की कमी सी है, सोचता हूं लिख दू हर दुख हर परेशानी हर बात का सच पर, शायद सच की और मेरी मुलाक़ात मै अभी एक सदी बची सी है, जीवन में किसी की कमी सी है कमी सी है। ~Akrit if you like my work  thenshare, comment your thoughts and follow the blog to stay updated. My Social handles

तू

 तू बात ना किया कर वफाओं की लोगो के साथ ऐसे भरी महफ़िल में अपनी पहचान गवाया नहीं करते, तू दिल फिर ना लगाना गैरो के साथ  ऐसे अपने दिल को दुखाया नहीं करते, तू शायरी नहीं सुनाना महफिलों मै जाके ऐसे अपने अंदर का दर्द किसी को बताया नहीं करते, तू भरोसा ना कर जाना बिना सोचे किसी पर भी ऐसे पुरानी गलतियां दोहराया नहीं करते, तू ना देखना किसी को प्यार करते हुए ऐसे कोई नया दर्द उगाया नहीं करते, तू कमजोर ना पड़ जाना किसी गैर के सामने ऐसे खुदका मज़ाक बनाया नहीं करते, तू बात ना किया कर वफाओं की लोगो के साथ ऐसे भरी महफ़िल मै अपनी पहचान गवाया नहीं करते गवाया नहीं करते। -Akrit if you do like my writings then please share, comment your thoughts and follow the blog to support my work. My social handles

मैं कलम हूं।

 मैं कलम हूं लिखता जाऊंगा दिल की हर बात को लफ़्ज़ों में पीरोता जाऊंगा हर याद को हर बात को दिल के अंदर दफन हो चुके उस हर राज को मैैं पन्नों पे बिखेरता जाऊंगा मैं कलम हूं लिखता जाऊंगा, हा लिखूंगा उसके बारे में भी जिसने तुम्हे लिखना सिखाया है, लिखूंगा उसकी खूबसूरती के बारे में जिसे देख तू आज भी पागल हो जाता है लिखूंगा  उसके हर अंदाज़ - अदह के बारे में जो आज भी तुझे मदहोश करते है उसके प्यार के बारे में उसके इकरार के बारे में उसके जाने के बाद के गम के बारे में, उसके साथ होने की खुशी से लेके उसके ना होने के गम तक मैं तेरे साथ चलता जाऊंगा मैं कलम हूं लिखता जाऊंगा, लिखूंगा मैं तेरी ख्वाहिशों के बारे में जो तुने सिर्फ मुझे बताई है लिखूंगा मैं उन सपनों के बारे में जो तेरी ये आंखे रोज़ देखती है लिखूंगा उस खुशी के बारे में जो तू अपने माता - पिता के चेहरे पर देखना चाहता है लिखूंगा तेरी उन बचपन की यादों के बारे में जिन्हें याद करके आज भी तेरी आंखे भर आती है लिखूंगा तेरे यारों के बारे में जिन्हें तू कभी खुद बोल नहीं पाया और ना शायद बोल पाएगा की वो तेरे जीवन में उतने ही जरूरी है जितना जि...

फ़िर मिलेंगे।

 फ़िर मिलेंगे एक दिन वहीं जगह होगी वहीं शाम होगी मौसम भी प्यारा रहेगा और कुछ प्यारी बात होगी पुरानी यादों को याद करेंगे और कुछ नई बातें हम साथ करेंगे तेरी जुल्फों को फिर सेहलाके तेरी खूबसूरती की तारीफ करुंगा उसी तरह तू मुझे तंग कर मेरे बालों को खराब करना मेरे साथ बिताए कुछ ऐसे हसीन पलों को तू हमेशा याद करना, ऐसे ही बातों बातों मै अपनी यादों के डिब्बे मै कुछ और नई यादें हम यार भरेंगे फिर मिलेंगे एक दिन और कुछ प्यारी बातें हम साथ करेंगे,हर बीतता पल हमें तंग करेगा अलग होना होगा फिर ये सवाल भी खूब खलेगा पर जो भी होगा जैसा भी होगा साथ बिताए इन कुछ पलो को हम अपने दिल के काफी पास रखेंगे फिर मिलेंगे एक दिन और कुछ प्यारी बातें हम साथ करेंगे,फिर आखिर मै एक दूसरे को अलविदा करके अपने अपने जीवन मै वापिस लौटेंगे वो आखरी बार गले लगकर अपना प्यार साथ रखेंगे, एक दूसरे से फिर मिलने के झुटें वादें हम करेंगे पर उन्न वादों मै भी एक सुकून होगा ऐसे ही वादों को प्यार की यादों को हम हमेशा साथ रखेंगे फिर मिलेंगे एक दिन और कुछ प्यारी बातें हम साथ करेंगे हम साथ करेंगे। -Akrit If you like my work then share,com...